प्रेम ही गजल है गुनगुनाने के लिए

???Զเधे Զเधे ???

!! “प्रेम,, ही.. गजल है,, गुनगुनाने के लिए…!!
“प्रेम,, ही.. नगमा है,, सुनाने के लिए…!!

“ये, वो जज्बा है,, जो तुझीसे ही मिला है प्रिये…!!
थोड़ा, हौसला भी दे दे,, “प्रेम, निभाने के लिए…!!

“न, छुपाया की,, “प्रेम.. कितना है…!!
“न, जताया की,, “प्रेम.. कितना है…!!

“बस, एक तुझे,, एक मुझे ही मालूम प्रीये…!!
तुझपे मरने को ये,, दिल बेकरार कितना है…!!

“दर्द, जो दे दिया,, काफी है बेखुदी के लिए…!!
“प्रेम, जो पा लिया,, जरूरी था ज़िन्दगी के लिए…!!

“हम, तो मर ही चुके हैं,, ये तुझे मालूम प्रिये…!!
“सिर्फ, जिन्दा हैं,, तेरे “गीत, को गाने के लिए…
——————–!! जै जै श्री.. राधे !!—————————–


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