मूर्ति में तुझे क्या देखूं

*?? मूर्ति में तुझे क्या देखूं ;*
*तू नूर बनकर नैनो? में समाया है*….*
*अब जिधर देखता हूँ प्यारे;*
*उधर तूने अपना रूप बनाया है….?*
*इस आशिकी को कौन समझे;*
*जगने बहुत ठुकराया है…?*
*पर गम नहीं किसीके रूठ जानेका;?*
*क्योंकी मेरे श्याम ने मुझे अपनाया है!?*

*????जय श्री श्याम जी????*


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