इंसान अपना वो चेहरा तो

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*”ॐ”
*इंसान अपना वो चेहरा तो*
*खूब सजाता है , जिस पर*
*लोगों की नज़र होती है*
*मगर आत्मा को सजाने की*
*कोशिश कोई नही करता*,
*जिस पर परमात्मा की नजर होती है।*
??? *शुप्रभात* ???
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