काल कपाल महाकाल प्रभु

काल कपाल महाकाल प्रभु तेरा श्रृंगार और
अंदाज औरो से निराला है…
तभी तो तू मन को भाता है….
सब मठ-मन्दिरों के वासी है,
सिर्फ तू ही है जो श्मशान में धूनी रमाता है ।।

???जय महाकाल ???


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